२४ बैशाख २०७८, शुक्रबार

गजल: रामदेब रत्गैयाँ

रिसैबोत का कोई बात नाई, मुरघिनके दात नाई
हमार नेपाल मे महिलन के, तिक्याईल जात नाई
भुखल पेट दिनभर कर्ति जाक, खैना जुन हुईलसे
घरक सबमनिन खवाक, बट्लिम हेर्लेसे भात नाई
अपन घर चाहे जसिन रलसेफे, भ्वाज कर्क गैलसे
मानोनी मानो नित परनैछोर्ना, थरुवाके लात नाई
छुट्कारा पैना लग्लेसे फे, मेरमेराईक दुःख कष्टसे
अपनथरुवासे छुट्नाडरले, आवाज उठैना बात नाई
रोज दिन एक्नाएक्ठो महिला, शोषित हुईती गैलसे
सक्कु देख्तीसुन्ती जैनाबरु, बचैना केक्रो हात नाई
रामदेब रत्गैयाँ
राजापुर–२, नयाँगाउँ, बर्दिया
Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button