१९ श्रावण २०७८, मंगलवार

गजल: श्याम शराबी

जब बन्व ओरसे हावा मन्द मन्द आइट
तब इ मनम दोसर मेरके आनन्द आइट
जीवजन्तु चिरैं चुरुङ्गनके मीठ बोलिसंग
चारूओर मेरमेरिक फुलक सुगंध आइट
प्रकृति ओ साहित्य ओस्त ओस्त लागट
ओमसे बहर ओ कविताक छन्द आइट
बन्वा कुल्वा लडिया हिमाल पहार देक्ख
आपन ड्याश प्रती अप्नह घमण्ड आइट
श्याम शराबी, राजापुर
Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button